अपनी जमीन पर लौट आए मिल गया स्वर्ग

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अपनी जमीन पर लौट आए मिल गया स्वर्ग

हताश से भरे चेहरे  भारी आवाज टूटे चप्पल, फटे कपड़े ,प्रवासी मजदूरों की व्यवस्था कह रही थी . केरल के एनाकुलम से  1598 प्रवासी मजदूर बुधवार को रांची लौटे . अपने प्रदेश में लौटते ही उनके आंखें नाम थी। हटिया स्टेशन पर उतरते ही मजदूरों ने जमीन चुम्मी सब ने कहा कि सरकार के प्रयास से उन्हें नई जिंदगी मिली है . लॉक डाउन में 4 दिनों तक सिर्फ नाम का जिंदा रहा . यह समय नर्क में काटने जैसा था।

अपनी जमीन पर लौट गए हैं . लग रहा है स्वर्ग मिल गया है इसी बीच एक महिला ने कहा कि में बेटी को दूध की जगह पानी चीनी का घोल हुआ माल पिलाकर उनकी भूख मिटाती थी। उसने कहा कि अपने घर में रोटी मिलेगा तो बाहर जाने की जरूरत क्या है।

परिचितों से कर्ज लेकर ट्रेन का भाड़ा दिया

केरल से लौटे 1598 मजदूरों के पास खाने को पैसा नहीं थी . किसी ने रिश्तेदार से तो किसी ने परिचित से पैसे उधार लेकर ट्रेन का भाड़ा दिया .

मुझे धन्यवाद ना कहे यह मेरा कर्तव्य है

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा मुझे खुशी है कि लॉक डाउन में फंसे झारखंड वासी अपने घर सकुशल पहुंच रहे हैं। अपने आग्रह है कि मुझे धन्यवाद मत कहिए यह मेरा कर्तव्य है. कि मुसीबत में फंसे मेरे राज्य के लोगों की सेवा करो। अभी भी राज्य में मेरे कई भाई-बहन अपने घर आने को उत्सुक हैं राज्य सरकार पूरी कोशिश कर रही है ऐसे में फंसे लोगों को अपने घर पहुंचाने की . दरअसल मुख्यमंत्री से वीडियो साझा कर लिटिल गंज पलामू के प्रवासी श्रमिकों ने सरकार को शुक्रिया कहा था.

केरल सरकार ने झारखंड सरकार से बात किए बिना मजदूरों से वसूला भाड़ा

रांची प्रवासी मजदूरों को झारखंड लाने के लिए चल रही ट्रेन में से अब तक सिर्फ केरल में ही मजदूरों से किराया वसूल की है इसके लिए केरल सरकार ने झारखंड सरकार से बात तक नहीं की . झारखंड सरकार ने उन सभी राज्यों को किराए का भुगतान कर रही है जिन्हें किराए की मांग की है .

आंध्र प्रदेश सरकार ने भी पैसे नहीं मांगे हैं। सरकार ने भी पैसे नहीं मांगे हैं राजस्थान सरकार ने कोटा से छात्रों को झारखंड पहुंचाने के एवज में राज्य सरकार से 16 लाख रुपए लिए . उड़ीसा बिहार छत्तीसगढ़ से मजदूरों को लाने के लिए 8 मई तक बस सेवा जारी रहेगा . उत्तर प्रदेश और बंगाल से मजदूर को लाने के लिए बसें नहीं चल रहे हैं संबंधित सरकारों से इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है।

 आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने सरकार से पैसे नहीं मांगे

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने मजदूरों को वापस भेजने के लिए झारखंड सरकार से पैसे नहीं मांगे दोनों राज्यों ने मजदूर को रखकर खिलाने के बदले उन्हें वापस भेजना बेहतर समझा इन राज्यों से झारखंड तक ट्रेन चलाने का खर्च करीब 4.5 लाख रुपए हैं. तेलंगाना ने तो एक ही दिन में पांच ट्रेनें भेजने की पेशकश की थी . पंजाब सरकार ने आपदा राहत कोष से मजदूरों के किराए के भुगतान का आदेश दिया है।

ट्रेन को चलाने से पहले किराए का भुगतान करना पड़ता है. पैसे के लिए रेलवे से सरकार की टिकट उपलब्ध करा दिया जाता है बाद संबंधित राज्य जहां के मजदूर है उसे पैसे की मांग करती है यह मजदूर से पैसा लेकर रेलवे को भुगतान कर देती है.

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