लॉक डाउन में छिन गई दिहाडी दाल रोटी पर आफत

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लॉक डाउन में छिन गई दिहाडी दाल रोटी पर आफत

काम बंद होने के बाद मजदूरों ने बताई पीड़ा दूसरों के रहमो करम पर कट रही है जिंदगी

हर वर्ष मजदूर दिवस पर मजदूरों के कल्याण की बातें होती है। अगले दिन सब कुछ बदल जाता है। लेकिन नहीं बदल पाती है तो मजदूरों की तकदीर पुलिस टॉप जीवन की गाड़ी खींचने के लिए साल भर तक उनका संघर्ष जारी रहता है. और फिर से चला आता है मजदूर दिवस जहां मजदूर कल्याण की बातें कही सुनी जाती है.

विगत 1 महीने से ऐसे मजदूरों के समक्ष दाल रोटी जुटाने पर आफत आन पड़ी है पुलिस टॉप हर रोज पेट की खातिर बिहारी या छोटे-मोटे काम धंधा कर इनका गुजारा हो रहा था।

करो ना महामारी के कारण इनका कामकाज पूरी तरह बंद हो गया है पुलिस टॉप घर में रहने की मजबूरी हो गई लेकिन पेट है तो उनकी चिंता सताएगी ही। मजदूरों से बात कर उनकी पीड़ा जानने की कोशिश की गई.

राजमिस्त्री कहते हैं कि हर रोज इतना  कमा लेता था कि पूरे परिवार को कम से कम दो वक्त की रोटी खिला सकूं। लॉक डाउन के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया है। जहां-तहां से यदि सहयोग नहीं मिले तो भूखे मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

1 मई को पूरे विश्व में मजदूर दिवस मनाया जाता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के दिहाडी मजदूरों को मजदूर दिवस के बारे में जानकारी तक नहीं है. मजदूरों का कहना है कि आज एक सामाजिक काम था।

इसके कारण चारदीवारी का निर्माण कर रहे थे लव डाउन के कारण ऐसे भी हम मजदूर बैठे हुए हैं एक माह से काम नहीं मिल पा रहा है .पुलिस मजदूर दिवस के बारे में मजदूरों ने बताया कि इसके बारे में हम लोग नहीं जानते हैं

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