लॉक डाउन में मजदूर वर्ग की चुनौतियां बढ़ी

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लॉक डाउन में मजदूर वर्ग की चुनौतियां बढ़ी

क्रोना वैश्विक महामारी है। पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में मजदूर वर्ग गंभीर संकट में फंस गया है उसका जीविका प्रमुख आधार श्रम शक्ति है

किसी प्रकार का युद्ध संकट महामारी प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियां में खासकर असंगठित क्षेत्र के गरीब कामगारों की बदहाली की तस्वीर साफ-साफ दिखलाई पड़ने लगती है।

मजदूरों की शर्म शक्ति और खून पसीने से दुनिया में आयाम स्थापित होते हैं। लेकिन उसके लिए कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है पुलिस टॉप इस विपदा की खड़ी में सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी समस्याओं पर चिंता जरूरी है।

हमारा विकास की आधारभूत संरचना पूंजीवाद ढांचे पर खड़ी है। इस बदलने की जरूरत है  इस वर्ष मजदूर दिवस को करोना संक्रमण और लॉक डाउन के उपजे सवालों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए पुलिस टॉप आपदा का कोई निश्चित समय नहीं होता है। हमारी सामाजिक व आर्थिक अर्थव्यवस्था को कारण करोड़ों मजदूर देश के कोने-कोने में फंसे हैं।

उनके पास ना घर है ना भोजन और ना ही पैसे हैं। करो मजदूर का रोजगार खतरे में है पुलिस उनकी लाचारी और बेबसी बयां नहीं की जा सकती है पुलिस के खिलाफ पूरे देश के साथ मजदूर वर्ग लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां हैं अर्थव्यवस्था संकट ग्रस्त है। आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ेगी।

आज मजदूर वर्ग हास्य पर है इसलिए श्रम की प्रतिष्ठा को स्थापित करने की जरूरत है। तभी दिवस को सार्थक किया जा सकता है और मजदूर वर्ग का भविष्य रक्षित रह सकता है।

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