सभी प्रखंडों में बना 100 बेड का क्वारेंटिन कैंप

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सभी प्रखंडों में बना 100 बेड का क्वारेंटिन कैंप अंचलाधिकारी होंगे नोडल पदाधिकारी

वैश्विक महामारी को लेकर देशवासी लॉक डाउन के दौरान राज्य से बाहर  जिलों में फंसे हुए लोगों का बांका में प्रवेश की संभावना प्रबल हो गई है पुलिस टॉप राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने भी प्रवासी लोगों को राज्य में लाने की हरी झंडी दे दी है।

बताया जा रहा है कि आगामी 3 मई के बाद लॉक डाउन में फंसे प्रवासी लोग जिला में प्रवेश कर सकते हैं।

हालांकि इस संबंध में विगत 26 अप्रैल को राज्य आपदा विभाग के प्रधान सचिव के द्वारा एक वीडियो कॉन्फ्रेंस कर जिले के सभी जिला अधिकारी व एसपी को जिले के विभिन्न प्रखंड में  कैंप बनाने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद से बांका जिला प्रशासन ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि जिले के सभी प्रखंड में एक-एक क्वालिटी के चिन्हित कर लिए गए हैं। जिसमें डीएम सुहर्ष भगत ने निर्देश पर उपयुक्त कैंप में 1 सौ से अधिक लोगों के रखने की व्यवस्था की जानी है।

इसके नोडल पदाधिकारी के रूप में सभी प्रखंड के अंचलाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। इसके अलावा जिला से एक-एक वरीय पदाधिकारी को उक्त कैंप का प्रभारी भी बनाया गया है।

खासी अभी की सभी क्वारेंटिन कैंप में एसपी अरविंद कुमार गुप्ता के द्वारा सभी थानाध्यक्षों को सुरक्षा का जिम्मा एवं सी एस द्वारा चिकित्सा पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। कैंप में मास्क सैनिटाइजर हैंड वाश साबुन आदि की व्यवस्था मौजूद रहेगी।

इसके अलावा कैंप में रह रहे लोगों का पंजीकरण भी अनिवार्य रूप से किया जाना है। इसके अलावा कैंप में सामग्री विवरण स्टॉक पंजी वितरण पंजी लॉग बुक का भी संधारण किया जाना है। डीएम के निर्देश पर सभी कैंप के नोडल पदाधिकारियों को प्रत्यक्ष दिन की गतिविधि की रिपोर्ट जिला नियंत्रण कक्ष से आपदा प्रबंधन को देनी है।

यह कैंप सीसीटीवी कैमरा की जद में रहेगा तथा क्या में रह रहे लोगों के प्रत्येक गतिविधि की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी की जानी है सुरक्षा की दृष्टि कौन से सभी कैंप को बैरिकेडिंग करने का भी निर्देश दिया गया है।

क्वारेंटिनकैंप में भर्ती लोगों के लिए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से भोजन मुहैया कराया जाएगा। कैंप में भर्ती लोगों का स्क्रीनिंग वह सैंपल जांच के बाद ही चिकित्सक की सलाह पर घर भेजा जाएगा पुलिस टॉप कैंप में प्रवासी लोगों को 14 दिनों तक रहना अनिवार्य है।

वहीं अगर किसी प्रवासी में करुणा का कोई भी लक्षण पाया गया तो उन्हें 21 दिनों तक इस क्या में रखा जाएगा।

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